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C PROGRAM IN HINDI



C programming language इस दुनीया की सबसे ज्यादा लोकप्रिय programming भाषा है |
इसे 1972 में Dennis Ritchie(डेनिस रित्ची) द्वारा USA(अमेरिका) के Bell Labs में बनाया जाया था | इसको बनाने के पीछे का मुख्य उदेश्य UNIX operating system था |1980 के दशक के
दौरान, सी वाणिज्यिक सॉफ्टवेयर को विकसित करने के लिए पसंद की भाषा बन गई। ये बहुत मूल रूप से सिस्टम सॉफ्टवेयर लिखने के लिए सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाने बाला प्रोग्रामिंग भाषा है |कई operating systems जैसे Linux, Windows, और Mac में इसका उपयोग हुआ है|
c program बनाने के लिए आपके कंप्यूटर में एक सॉफ्टवेर चाहिय जिसे हम compiler कहते है |
compiler के बारे में हम आपको पहले भी बिस्तर से बता चुके है| internet पर कई तरह के compiler उपलब्द है |आप कोई भी compiler उसे कर सकते है | बैसे तो इंडिया के ज्यादा तर colage में Turbo c++ का उपयोग होता है लेकिन शुरु में मै आपको Bloodshed Dev-Cpp उपयोग करने की सलाह दूँगा |
इन्हे download करने के लिए आप Google पर c compiler के नाम लिखकर सर्च कर सकते है या मैंने निचे इनके वेबसाइट का पूरा address भी लिख दिया है |अगर आप चाहे तो इन लिंक पर क्लीक करके सीधे इनके वेबसाइट पर जा के बहां से इन compiler को download कर सकते है |
http://www.bloodshed.net/dev/devcpp.html
इन compiler को ठीक उसी तरह install करे जैसे दुसरे software को करते है | इसे install करना बहुत आसान है ।
अब हम अपना सबसे पहला c program लिकने जा रहे है |मैं यहाँ Bloodshed Dev-Cpp compiler का उपयोग कर रहा हूँ |
सबसे पहले अपना compiler पर दो बार क्लिक करके उसे खोल लें (जैसे किसी Folder या software को on करते है )
या Start>> प्रोग्राम >> Dev-Cpp और enter दबाएं |
उसके बाद निम्नलिखित चित्रों में देखिये :-
Capture
File पर क्लिक करीये |
Capture2
अब new पर click करीये |
Capture3
इन code को copy करके अपने compiler पर paste कीजिए |
 #include
 main()
 {
 printf("Hello World!\n");
 system("pause");

}


इन code का मतलब मै आपको अगले पेज में बताऊंगा |
याद रखें के code को save करते बक्त उसका नाम के अंत में .c लिखना ना बुलें बरना program RUN नहीं हो पायेगा |
Capture7
save करने के बाद program को compile करना होता है |
Capture8
compile करने के बाद इसे Run करे | अगर आपका programme सही से compile हो गया है तो आपका कोड run हो जायेगा । जब programme Run होगा तो एक काला रंग का स्क्रीन आप के कंप्यूटर पर खुल कर आ जायेगा और उसपर Hello World लिखा रहेगा ।

UNDERSTANDING FIRST C PROGRAM IN HINDI

छले पाठ में हम ने जो c program लिखा था वो निम्नलिखित है :-
 #include <stdio.h>
main()
{
printf("Hello World");
system("pause");
}
#include<stdio.h> ये stdio.h हेडर(header ) फाइल है |हर c program में इस header फाइल को होना ही चाहिए | हम #include लिखकर stdio.h हेडर(header ) फाइल को अपने c program में जोर लेते है |यहाँ # एक preprocessor(प्रीप्रोसेस्सर) है जिसे include से पहले लिखना होता है इस preprocessor के बारे में हम बाद में और भी बदेंगे | इस stdio.h हेडर(header ) फाइल में कई अलग-अलग तरह के कामों को करबाने के लिए पहले से ही कुछ function(फंक्शन) बनाकर रखे गए है जिन्हें built-in function कहते है |इन built-in function का उपयोग हमे अपने program में करना होता है इसीलिए हम इस stdio.h हेडर(header ) फाइल को अपने c program में जोरते है जैसे की हमने अपने पहले program में printf() का उपयोग किया है ये printf() को हमारा compiler इसलिय समझ पाया क्योंकी हमने program में stdio.h हेडर(header ) फाइल को include किया है या कहिये की हेडर(header ) फाइल को जोर है |कई और भी header फाइल होते है जिनका उपयोग हम आगे सीखेंगे |
main() ये एक function है और इसके बाद से ही curly brackets { } शुरु होता है { जो program के अंत में खत्म होता है } | अभी हम जो program बनाएंगे उन सब में सारे code को इस main(){ } के अंदर ही लिखेंगे | अगर हम main() फंक्शन के बाहर कुछ लिखे तो इसका एक तरीका है जो हम बाद में पदेंगे |फिलहाल आप इतना समझो की हम header फाइल (#include<stdio.h>) को छोरकर बाकी सब main(){ } के अंदर ही लिखेंगे
printf(“Hello World “); ये printf(“ ”); वाक्य moniter के screen(स्क्रीन) पर कुछ लिखा हुआ दिखने के लिए उपयोग किया जाता है | हमने यहाँ printfके अंदर hello world लिखा है तो
जब ये program चलाया जायेगा तो हम screen(स्क्रीन) पर hello world लिखा देखेंगे आप यहाँ hello world के जगह अपना नाम या जो आप चाहे लिख सकते है | लेकिन याद रहे सबकुछ इन ” ” चिन्हों के अंदर होना चाहिये जैसे “your name” और जब सब लिख ले तो इस ; चिन्हों का उपयोग ना भूले जैसे printf(“your name “);

system(“pause”); इसका उपयोग आप चाहे तो करे चाहे तो ना करे लेकिन मैंने इसका उपयोग इसलिए किया क्योंकि dev Cpp में जब program को चलाया(run) करबाया जाता है तो वो काला सा स्क्रीन किसपर output लिखकर आता है वो अपने आप बंद भी हो जाता है ये system(“pause”); कोड output बाले स्क्रीन को रोके रखता है और आप output को देख पातें है | turbo c compiler में इस code की जरुरत नहीं |आप dev Cpp में भी system(“pause”); के बिना program चलाकर अंतर देखें |
आगे हम variables बनाना करना सीखेंगे |लेकिन तब तक आप निम्नलिखित program के code को अच्छे से समझो और compiler पर चलाकर देखें |इन्हे copy ना करे अपने आप compiler पर लिखें |

उदाहरण 1 )
   #include<stdio.h>
   main()
   {
     printf(“This is santosh mahato”);
     printf(“I am from mano.com”);
     printf(“if you like this website then please tell your friends on facebook” );
   }

उदाहरण 2 )
    #include<stdio.h>
    main()
    {
      printf(“This is santosh mahato\n”);
      printf(“I am from mano.com\n”);
      printf(“if you like this website then please tell your friends on twitter\n” );
     }

दोनों उदाहरण में आप देख सकते है की उदाहरण 2 में \n का उपयोग हुआ है |इसके उपयोग से पहले उदाहरण के तरह output में तीनों लाइन एक साथ नहीं दीखते है |जब आप program को चलाएंगे तो खुद समझ जाएंगे |

Note:-
जब आप program को चलते है तो अगर output वाला काला screen अगर तुरंत बंद हो जाता है तो आप program code के अंत में system(“pause”); लिख सकते है या आप header में #include<stdio.h> के साथ #include<conio.h> लिखके और अंत में getch(); लिख सकते है
उदाहरण 1 )
  #include <stdio.h>
  #include<conio.h>
  main()
   {

    printf("Hello World");
    getch();
   }

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